Monday, March 20, 2017

रवीश का कार्यक्रम

अभी रवीश का कार्यक्रम देखने का मौका मिला,
उसमें फर्ज़ी मुठभेड़ों और निर्दोष लोगों को फंसाये जाने के मामलों की चर्चा हो रही थी,
इनमें मुसलमान पीड़ित, सिख और हिन्दु पीड़ित भी थे,
हम सब जानते हैं ज़्यादातर फर्ज़ी मुठभेडें पुलिस वाले तरक्की और इनाम के लालच में करते हैं,
अलबत्ता मुसलमानों को फ़र्जी मामलों में फंसाने और मारने का काम हिन्दुओं को आतंकवाद का हव्वा दिखा कर वोट बटोरने के लिये भी किया जाता है,
लेकिन रवीश के कार्यक्रम में मुझे एक कमी लगी,
रवीश ने एक भी मामला आदिवासियों का शामिल नहीं किया,
19 आदिवासियों को फर्जी मुठभेड़ में मारने का सिंगारम मामला मेरे द्वारा हाईकोर्ट में डाला गया,
बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नें माना था कि हाँ वह एक फर्जी मुठभेड़ थी,
माटवाड़ा में 3 आदिवासियों की आंखे चाकू से बाहर निकालने के बाद उन्हें पीट पीट कर मारने का मामला मेरे द्वारा कोर्ट पहुंचाया गया था,
जिसमें बाद में तीन पुलिस वालों को जेल में भी डाला गया था,
इसके अलावा साढ़े पांच सौ केस मैने सुप्रीम कोर्ट को सौंपे थे जिनके लिये मै आज भी इन्साफ का इन्तज़ार कर रहा हूँ,
मुझे आदिवासियों के मामले शामिल ना किये जाने पर रवीश से कोई शिकायत नहीं है,
मैं बस यह कहना चाहता हूँ कि आदिवासियों की हत्या का मामला पुलिस वालों की गलती और अपराध का मामला नहीं है,
बल्कि आदिवासियों को तो जान समझ कर हम पूरे होश में मार रहे हैं,
ताकि उनकी ज़मीनों, जंगलों और खनिजों पर कब्ज़ा कर के हम अपनी अय्याशी का स्तर और बढ़ा सकें,
आदिवासी की हत्या पूरे भारतीय संभ्रांत वर्ग के अपराधिक चरित्र में ढल जाने की कहानी है,
उस कहानी का पर्दाफाश ज़रूरी है,

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