Monday, March 20, 2017

जाति प्रथा

जो लोग मानते हैं कि जाति का जन्म कर्म के आधार पर हुआ था और बाद में इस जाति प्रथा में विकृति आ गई वो इस पर फिर से सोचें .
क्या ऐसा सम्भव है कि एक ब्राह्मण अपने बेटे को शूद्र बन जाने देगा ?
क्या प्राचीन भारत में किसी विद्वान ब्राह्मण के मूर्ख बेटे को जबरन शूद्र बना दिया जाता था या पिता खुद ही अपने बेटे को ले जाकर शूद्रों की बस्ती में छोड़ आता था ?
क्या कहीं ऐसा कोई वर्णन मिला है आज तक ?
नहीं मिला ना ?
इसलिये यह कहना कि जाति प्रथा कि शुरुआत कर्म के आधार पर हुई थी सबसे बड़ा झूठ है .
इस बात पर विश्वास करना मुश्किल है कि भारत में जातियां कर्म के आधार पर बनी .
अर्थात एक ही परिवार का एक बेटा अपने कर्म से ब्राह्मण बन सकता था और दूसरा बेटा अगर ज्ञान नहीं प्राप्त कर पाया तो वह शूद्र बन जाता था .
भारत में विभिन्न जातियों के बीच जो नफरत है उसे देख कर साफ़ साफ़ लगता है कि जातिप्रथा तो असल में एक संस्कृति के विजेताओं और स्वामियों द्वारा दूसरी संस्कृति के पराजित दास लोगों के दमन का परिणाम है .
आज भी इस भारतीय जाति प्रथा को भारत में समर्थन मिलना या इसका किसी भी रूप में जिंदा रहना भारत के चेहरे का सबसे कुरूप दाग है .
जाति प्रथा के रहते हुए भारत की संस्कृति पर गर्व करने की बात कहना ही क्रूरता है .

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