Monday, March 20, 2017

युवाओं से चर्चा

साईकिल यात्रा के दौरान गांव मे काम करने वाले,
युवा कार्यकर्ताओं के साथ मेरी बातचीत,
मैने पूछा, मान लो दो ज़िले हों,
एक जिले में बहुत बड़ी बड़ी फैक्टरियां हों,
और दूसरे जिले में कोई फैक्टरी नहीं हो,
तो कौन से जिले को विकसित कहा जायेगा ?
फैक्टरी वाले जिले को,
या बिना फैक्टरी वाले जिले को ?
युवाओं ने उत्तर दिया जी फैक्टरियों वाले जिले को विकसित जिला कहेंगे,
मैने आगे पूछा,
फैक्टरी का मालिक अमीर होता है या गरीब ?
अमीर आदमी, युवाओं ने एक स्वर में जवाब दिया,
मैनें पूछा, फैक्टरियों का मुनाफा किसकी जेब में जाता है ? अमीर की या गरीब की ?
अमीर की जेब में , युवाओं ने कहा,
अमीर की फैक्टरी के लिये जमीन किसकी ली जाती है, अमीर की या गरीब की ? मैनें पूछा,
गरीब की जमीन ही ली जाती है, युवाओं नें जवाब दिया,
तो विकास का अर्थ है गरीब से ले लो और अमीर को दे दो,
ठीक है ?
युवा चौंक पड़े,
बोले हां सच तो है पर हमने कभी ऐसा सोचा नहीं था,
मैनें बात आगे बढ़ाई,
उद्योगपति को गरीब की ज़मीन कैसे मिलती है ?
युवाओं ने कहा सरकार गरीबो से ज़मीन लेकर अमीरों को देती है,
मैनें पूछा क्या गरीब आराम से अपनी ज़मीन सरकार को दे देता है ?
युवाओं ने कहा नहीं पुलिस आती है किसानों को पीटती है, गोली चलाती है,
मैनें पूछा देश का मालिक कौन है ?
देश की मालिक देश की जनता है, युवाओं ने जवाब दिया,
पुलिस और सरकार का मालिक कौन है ? मैने पूछा ?
पुलिस और सरकार का मालिक भी जनता है युवाओं नें कहा,
तो मालिक का माल नौकर छीन रहा है ?
और मालिक विरोध कर रहा है तो नौकर मालिक को पीट रहा है ?
और इसे हम कहते हैं लोकतन्त्र, मैनें कहा,
देश में करोड़ों लोगों की ज़मीनों, पहाड़ों, नदियों पर इसी तरह पीट पीट कर कब्ज़ा किया जा रहा है,
अमीरों के जनता की ज़मीनें छीनने के लिये जिन सिपाहियों को लगाया जा रहा है वह भी गरीबों के बच्चे हैं,
तो गरीब ही गरीब को मार रहा है और फायदा अमीर का हो रहा है,
यही राजनीति की चालाकी है,
इसे समझना और इसका जवाब देना हमारी राजनीति होगी,
बाकी की चर्चा अगले सत्र में,

No comments:

Post a Comment