Monday, March 20, 2017

देवडूंगरी

आज साइकिल चलाते हुए राजस्थान के राजसमन्द ज़िले के देवडूंगरी गांव में पहुंचा हूं,
यहां एक जनसंगठन के केन्द्र में ठहरा हूँ,
इस जन संगठन का नाम मजदूर किसान शक्ति संगठन है,
यह संगठन बहुत सारी बड़ी नीतियों और कार्यक्रमों को शुरू करवाने के लिये जिम्मेदार है,
भारत में सूचना का अधिकार यानी आरटीआई कानून इसी संगठन के प्रयासों से लागू किया गया था,
सरकार को नेरेगा कार्यक्रम और सिटिजन चार्टर का कानून भी इसी संगठन के प्रयासों से लागू करना पड़ा था,
संगठन की शुरूआत गांव वालों के साथ मिलकर अरूणा रॉय ने करी थी,
अरूणा रॉय पहले आईएएस अधिकारी थीं,
जिसे त्याग कर उन्होंने गांव में रहकर काम करना शुरू किया,
उनके साथ निखिल डे अपना अपनी ऐशो आराम छोड़ कर गांव में काम करने आ गये,
स्थानीय साथी शंकर सिंह और सैंकड़ों ग्रामीण युवाओं ने मिल कर गांव के लोगों के आधिकारों के लिये संघर्ष किया,
एक सिद्धांत के तहत यह तय किया गया था कि संगठन में कोई भी स्थानीय मज़दूर को मिलने वाली न्यूनतम मज़दूरी से ज़्यादा वेतन नहीं लेगा,
अरुणा रॉय और निखिल डे भी आज तक एक साधारण मजदूर को मिलने वाली मजदूरी लेकर 24 घन्टे समाज के लिये काम करते हैं,
यदि आप संगठन के लोगों का रहन सहन का स्तर देखेंगे तो आप विश्वास नहीं कर पायेंगे कि कोई इतनी ज़्यादा सादगी से कैसे रह सकता है,
देश भर से कानून, प्रशासन और समाज सेवा की पढ़ाई करने वाले कालेज अपने विद्यार्थियों को यहाँ सीखने भेजते हैं,
अरूणा रॉय को मैगसेसे पुरस्कार मिल चुका है, और वे UPA सरकार की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्य रह चुकी हैं,
आज मुझे देश भर से यहां आये हुए बहुत सारे युवाओं से बात करने का मौका मिला है,

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