Monday, March 20, 2017

आजादी का मतलब क्या है ?

जब मुझे कहीं गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में बोलने के लिए बुलाया जाता है तो मैं बोलता हूँ कि महात्मा गांधी से जब पूछा गया था कि आज़ादी का आपके लिए क्या मतलब है ? तो गांधी जी नें कहा था जब तक देश की अंतिम व्यक्ति की आंख में आंसू है तब तक मैं मानूंगा कि आज़ादी अभी अधूरी है .
क्या देश के दूर गाँव की दलित बस्ती में , मजदूरों की बस्ती में , आदिवासियों की , महिलाओं की आंख में , भारत के अल्पसंख्यकों की आँखों में अब कोई आंसू नहीं हैं ?
दलितों की बस्तियां जलाई जाती हैं , बच्चों को काट डाला जाता है , उनकी महिलाओं के साथ रोज़ बलात्कार की घटनाएँ होती हैं. अपराधियों को अदालतें रिहा कर रही हैं . लक्ष्मनपुर बाथे, बथानीटोला, शंकरबीघा इसके उदहारण हैं .
आदिवासियों के गाँव जलाए जा रहे हैं , उनकी ज़मीनें छीन कर उद्योगपतियों को सौंपी जा रही हैं आदिवासियों की हत्याएं करी जा रही हैं , आदिवासी महिलाओं के साथ अर्ध सैनिक बल के सैनिक बलात्कार कर रहे हैं सरकार बलात्कारियों को बचा रही है .
अल्पसंख्यकों के खान पान को अपराध घोषित किया जा रहा है . उन् पर हमले किये जा रहे हैं , पुलिस और सरकार गुंडों को बचाने में लगे हुए हैं , दादरी और हाशिमपुरा इसके उदहारण हैं .
इन हालात को देख कर लगता है कि गांधी के सपनों की आज़ादी तो आयी नहीं है
इसलिए हमें आज़ादी की लड़ाई जारी रखनी पड़ेगी
अभी हर गाँव को हर दलित बस्ती को हर महिला को हर अल्पसंख्यक तक आज़ादी पहुंचाने की लड़ाई बाकी है
गांधी नें भी अंग्रेजों के चले जाने को आज़ादी नहीं माना था
इसलिए गांधी आज़ादी के किसी जश्न में शामिल नहीं हुए बल्कि पन्द्रह अगस्त 1947 के दिन उन्होंने उपवास किया और अकेले बैठ कर चरखा चलाते रहे
इसलिए अगर आज जो छात्र भारत में आज़ादी का नारा लगा रहे हैं
वो सब गांधी के अधूरे सपने को पूरा करने का ही काम कर रहे हैं
इसलिए अगर भारत की सरकार गांधी के सपनों को पूरा करने वालों को जेल में डालने का काम करती है
तो यह एक खतरनाक हालत है
इसका मतलब है सरकार गोडसे के एजेंडे पर काम कर रही है
काम गोडसे का और नाम गांधी का नहीं चलेगा
गोडसे वादियों की सरकार को बेनकाब करना ज़रूरी है

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