Monday, March 20, 2017

बालेन्दु स्वामी

क्या यह संभव लगता है कि एक गैर भाजपाई सरकार के शासन में एक पूरे परिवार पर इतने हमले किये जाएं कि उन्हें मुल्क छोड़ कर जाना पड़े,
उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में हमारे मित्र बालेंदू स्वामी रहते थे,
वे पहले एक धर्म गुरु थे,
उनका वृंदावन में परिवारिक ज़मीन पर एक आश्रम था,
स्वामी बालेंदु ने ईश्वर के विषय में सत्य जानने के लिये लम्बे समय तक प्रयोग किये,
अन्त में उन्होंने घोषित किया कि वे ईश्वर के अस्तित्व में अब विश्वास नहीं करते,
उनकी पत्नी रमोना एक जर्मन महिला हैं,
स्वामी बालेंदु सभी धर्मों की कुरीतियों के विरूद्ध लिखने लगे,
पिछले साल देश भर में फैले वैज्ञानिक समझ रखने वाले नास्तिक दोस्तों ने तय किया कि हम सब स्वामी बालेंदु के आश्रम में इकट्ठा होंगे,
इस कार्यक्रम के शुरु होने के समय इस पर हमला कर दिया गया,
हमला करने वालों में समाजवादी पार्टी और भाजपा के नेता एक साथ शामिल थे,
प्रशासन इन हमलावरों का साथ दे रहा था,
प्रशासन ने बुलडोजर लाकर बालेन्दु के आश्रम के बाहर तोड़ फोड़ करी,
प्रशासन ने नास्तिक मित्र मिलन ना करने का हुक्म दिया,
पुलिस अधिकारी ने आकर बालेन्दु से पूछा आप यह राष्ट्र विरोधी कार्य क्यों कर रहे हैं ?
मैं यह सुन कर दंग रह गया,
क्योंकि आपका आस्तिक होना या नास्तिक होना अपनी मर्जी है,
कोई भी कानून आपकी धार्मिक आस्था तय नहीं कर सकता,
स्वामी बालेन्दु को जेल मे डालने की कोशिश करी जाने लगीं,
स्वामी बालेन्दु इस सब की सूचना देने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से मिले तो उसने उन्हें और रमोना को गालियां दी और बाहर निकाल दिया,
अपने परिवार पर चारों तरफ से हमलों और गिरफ्तारी की आशंका के बीच स्वामी बालेन्दु ने भारत छोड़ दिया,
उन्होंने लिखना बन्द कर दिया,
यह सब पढ़ कर ऐसा लग रहा है जैसे यह सब चौदहवीं शताब्दी के किसी कबीले में हो रहा है,
लेकिन यह इक्कीसवीं शताब्दी मे भारत मे गैर भाजपा समाजवादी शासन मे हुआ,
हमें खुद को पहचानना ज़रूर चाहिये,
वर्ना हम असल में होंगे कुछ और,
लेकिन खुद को समझेंगे कुछ और ही,
यह घटना हमारे सामने हमारी हकीकत की पोल खोलती है,

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