Monday, March 20, 2017

सिपाहियों की मौत

सुकमा में 12 सीआरपीएफ के सिपाही मारे गये,
हम बहुत दुखी हैं,
हमने हमेशा संवैधानिक प्रावधानों के पालन का आग्रह किया,
लेकिन सरकार नें संविधान की बात करने वालों पर हमेशा हमले किये,
मुझे छत्तीसगढ़ छोड़ने पर मजबूर किया गया,
मेरे बारे में कहा गया था कि मैं बस्तर से चला जाऊंगा तो बस्तर में शान्ति हो जायेगी,
लेकिन शान्ति नहीं आयी,
बिनायक सेन, सोनी सोरी, लिंगा कोड़ोपी, शालिनी गेरा, मालिनी सुब्रमण्यम, बेला भाटिया, प्रभात सिंह, सन्तोष यादव, सोमारू नाग को संविधान, न्याय और मानवाधिकारों की मांग करने के कारण जेल में डाला गया या बस्तर छोड़ने के लिये सरकार द्वारा हमले किये गये,
हमने बस्तर में न्याय और शांति की स्थापना के लिये हमेशा अपने प्रभाव और सेवाओं की पेशकश करी,
लेकिन हमारा हर बार ये विश्वास पक्का हुआ कि सरकार को शान्ति चाहिये ही नहीं,
सरकार को बस आदिवासियों की ज़मीन चाहिये,
सरकार को गरीब घरों से आये सिपाहियों की चिन्ता नहीं है,
सरकार को अमीर उद्योगपतियों की चिन्ता है,
वर्ना सरकार ऐसा रास्ता ज़रूर निकाल लेती जिसमें आदिवासियों को न्याय मिलता और सिपाहियों की जान बचती,
लेकिन सरकार में बैठे लोग ज़मीने देने के बदले बड़ी रिश्वतें ले चुके हैं,
इसलिये सरकार में बैठे लोग बस्तर में शान्ति नहीं आने देते,
आज़ादी के बाद से आज तक पूरे भारत में कोई भूमि अधिग्रहण सरकार ने बिना सिपाहियों के नहीं किया है,
ये कैसा विकास है जिसमें एक तरफ गरीब सिपाही है और सामने गरीब किसान और आदिवासी है,
गरीब से गरीब को लड़वा कर अमीरों की तिजोरी भरने वाली राजनीति सिपाहियों की मौत की जिम्मेदार है,
हम हिंसा को नापसंद करते हैं,
इसलिये फिर एक बार बस्तर की समस्या का समाधान बातचीत से करने का आग्रह करते हैं,

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