Monday, March 20, 2017

हवाई अड्डा के लिए गाँव उजाड़

साइकिल यात्रा करते हुए एक ऐसे गांव में पहुंचा हूँ जिसे सरकार किसी भी क्षण उजाड़ सकती है,
सरकार यहाँ हवाई अड्डा बनाना चाहती है,
हांलाकि यहां हवाई अड्डे की कोई ज़रूरत नहीं है,
पहले से बना हुआ जयपुर हवाई अड्डा सिर्फ 100 किलोमीटर दूर है,
नियमानुसार एक हवाई अड्डे से दूसरे हवाई अड्डे की दूरी कम से कम 250 किलोमीटर होनी चाहिये,
पहले यह गांव हवाई अड्डे से बाहर था,
लेकिन रसूखदार नेताओं ने अपनी ज़मीन बचाने के लिये हवाई अड्डे की दिशा बदलवा दी,
केन्द्र सरकार ने गांव वालों से वादा किया था कि गांव को नहीं उजाड़ा जायेगा,
लेकिन बाद में सरकार ने कहा कि गांव गैरकानूनी है और 2009 में बसा है,
गांव वालों का कहना है हमारे पूर्वज ब्रिटिश सेना और फिर भारतीय सेना में शामिल रहे हैं,
हमारा गांव 500 साल पुराना है,
गांव का नाम ढांणी राठौरान है,
ज़िला अजमेर है,
इस गांव के नाम पर पुराना रेलवे स्टेशन था,
गांव के लोग अपनी ज़मीन बचाने के लिये तीन साल से गांव के प्रवेश मार्ग पर धरना दे कर बैठे हैं,
गांव की महिलायें दो बार लम्बे समय तक अनशन भी कर चुकी हैं,
सरकार ने अनशन समाप्त करने बड़े बड़े वादे तो किये,
लेकिन एक का भी पालन नहीं किया,
गांव वाले अपनी जान देने को तैयार हैं,
लेकिन गांव छोड़ने को तैयार नहीं हैं,
कल इस गांव में गायाें का सम्मेलन होगा,
हज़ारों गाऐं कल खुद के प्राण बचाने के लिये प्रधानमंत्री मोदी से प्रार्थना करेंगी,
इस सम्मेलन में गांव की महिलायें और बच्चे भी शामिल रहेंगे,
गांव के लोगों का मुख्य धन्धा गाय का दूध बेचने का है,
अगर गांव को उजाड़ दिया गया तो गायें भूख से मर जायेंगी,
करीब एक हज़ार मोर भी मर जायेंगे,
कल होने वाले गाय सम्मेलन में मैं भी मौजूद
रहूँगा,
सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा रॉय, आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता कैलाश मीणा भी सम्मेलन में शामिल होंगे,
आस पास के जिलों से हज़ारों लोग इस गांव के साथ मुसीबत में साथ देने आ रहे हैं,
सरकार द्वारा भारतीय सेना के अनेकों सैनिकों का घर भी तोड़े जाने की तैयारी कर ली गई है,
कल अनेक सैनिक भी अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिये अपने प्राण न्यौझावर करने का संकल्प दोहरायेंगे,

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