Monday, March 20, 2017

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की छत्तीसगढ़ सरकार को फटकार

छत्तीसगढ़ में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमलों को देखते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार को फटकार लगाई है,
छत्तीसगढ़ में 14 साल से भाजपा की सरकार है,
इस सरकार ने लोगों के मानवाधिकार को कुचलने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है,
सरकारी सिपाहियों के द्वारा जितनी बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं से बलात्कार किए गए हैं,
जितने निर्दोष लोगों की हत्या की गई,
जितने निर्दोष आदिवासियों को जेलों में ठूंस दिया गया,
यहां तक कि वकीलों और पत्रकारों तक को या तो इलाके से बाहर निकाल दिया गया या जेलों में डाल दिया गया,
और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को राज्य छोड़ने के लिए मजबूर किया गया,
लेकिन यह कोई पहली बार नहीं है की राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस दिया है,
इससे पहले भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,आदिवासी आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ फैसले दे चुके हैं,
लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की कानों पर कभी जूं तक नहीं रेंगी,
फिर अचानक क्या हो गया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नोटिस पर कार्यवाही करने की बात लिखकर भेजी है ?
सरकार द्वारा पत्र मैं अन्य बातों के अलावा यह कहा गया है कि कलेक्टर की अध्यक्षता में मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी,
और पुलिस वालों को मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी,
यह सब हम बहुत पहले से कहते रहे हैं,
लेकिन सरकार ने कभी कोई कार्यवाही नहीं करी,
फिर अचानक सरकार इतनी संवेदनशील कैसे हो गई ?
दरअसल यह आने वाले चुनाव का खौफ है,
छत्तीसगढ़ में एक साल बाद चुनाव होगा,
भाजपा की हालत पूरे देश में बहुत कमजोर है,
छत्तीसगढ़ में भी भाजपा को चुनाव हारने का डर बना हुआ है,
यही डर भाजपा को सही रास्ते पर आने के लिए मजबूर कर रहा है,
वरना कल्लूरी को भी इस तरह बस्तर से ना हटाया जाता,
लेकिन हमें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखकर भेजे गए आश्वासनों पर बिल्कुल विश्वास नहीं है,
कलेक्टर की अगुवाई में अगर कोई समिति बनाई जाती है तो वह मानव अधिकारों का की रक्षा कैसे करेगी ?
उदाहरण के लिए जगदलपुर में कलेक्टर अपनी फेसबुक पोस्ट में कम्युनिस्टों के खिलाफ़ लिखता है,
जबकि बस्तर में कम्युनिस्ट नेता मनीष कुंजाम, संजय पराते मानवाधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इन दोनों पर भाजपा के नेता और पुलिस वाले हमले करते रहते हैं,
ऐसे में कलेक्टर भी अगर कम्युनिस्ट नेताओं के खिलाफ फेसबुक पर पोस्ट लिखेगा तो उससे गुंडों का हौसला बढ़ेगा,
इस भाजपाई मानसिकता के कलेक्टर मानव अधिकारों की रक्षा के लिए सच में कुछ करेंगे हमें विश्वास नहीं है,
इसी तरह से पुलिस वालों को ट्रेनिंग देने का काम यदि वहां काम करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अलावा भाजपा के ही विचारक करेंगे,
तो पुलिस और भी ज्यादा क्रूर होती जाएगी,
छत्तीसगढ़ में आजकल सरकारी आयोजनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक आकर प्रवचन देते हैं,
भाजपा पुलिसवालों की ट्रेनिंग भी संघ के लोगों से ही करवाएगी,
इसलिए भाजपा सरकार द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दिए गए आश्वासन पूरी तरह धोखेबाज़ी है,

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