Monday, March 20, 2017

श्मशान और चुनाव

श्मशान को चुनाव का मुद्दा बनाया जा सकता है ,
लेकिन उसके लिये मुसलमानों के कब्रिस्तान से लड़ाई की ज़रूरत नहीं है,
बल्कि हिन्दुओं के बीच मौजूद बुराई के खिलाफ लड़ाई की ज़रूरत है,
गांवों में अलग अलग जातियों के अलग अलग श्मशान हैं,
दलितों के श्मशानों पर दबंग जातियों के भू माफिया कब्ज़े कर रहे हैं,
दलितों की कोई सुनवाई नहीं करता,
कई मामलों में दलितों पर दबंग जातियों ने इस लिये हमले किये क्योंकि दलितों ने बरसते पानी में अपने बिना शेड वाले श्मशान की बजाय बड़ी जातियों के श्मशान में अपने स्वजनों के शवदाह करने की कोशिश करी,
आपको श्मशान को राजनीति का मुद्दा ज़रूर बनाना चाहिये,
आप अपने भाषण में कहिये अपने अनुयायी स्वर्ण हिन्दुओं से,
कि वे दलितों को भी अपने श्मशान प्रयोग करने दें,
आप हिंदुओं के हितैषी हैं तो हिंदुओं में सुधार लाइये,
हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़वाने से हिन्दुओं का क्या भला होगा ?
हिन्दुओं में जातिवाद खत्म करवाइये,
मोदी जी आप हिन्दुओं के हितैषी हैं या दुश्मन ?
आपको तो सही राजनैतिक मुद्दा चुनना भी नहीं आता,

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