Monday, March 20, 2017

जयपुर की कच्ची बस्ती

जयपुर की दो कच्ची बस्तियों में जाकर वहाँ के नागरिकों से बात करने का मौका मिला,
जयपुर दिल्ली मार्ग पर ईदगाह कालोनी में मुझे अलीम भाई द्वारा बुलाया गया था,
मेरे साथ कानून की पढ़ाई पढ़ने वाले नौजवान भी लड़के लड़कियां भी थे,
ये नौजवान मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के साथ काम कर रहे हैं,
उस बस्ती के बाहर कुछ ही देर में काफी लोग जमा हो गये,
मैने अपनी साइकिल यात्रा और उसके उद्देश्य के बारे में बताया,
सांप्रदायिकता की राजनीति के इतिहास और आज के हालात पर बातचीत हुई,
सभा के बाद हम लोग चाय की थड़ी पर बैठ कर चाय पी रहे थे,
तभी कई नौजवानों ने आकर मुझे बताया कि वे फेसबुक पर मेरा लिखा हुआ पढ़ते हैं और उस पर चर्चा करते हैं,
मुझे आजकल अक्सर लोग मिल जाते हैं जो कहते हैं कि वे मेरा लिखा हुआ पढ़ते हैं,
एक सामाजिक लेखक की इससे बड़ी सफलता क्या होगी कि उसके लिखे हुए पर चाय की गुमटियों पर बहस होती हो,
शुक्रिया साथियों यह विश्वास दिलाने के लिये कि लिखा हुआ बेकार नहीं जा रहा,
लोकतन्त्र के हक़ में लिखने वाले सभी साथियों को मेरा सन्देश यही है कि और ज़्यादा लिखिये,
आपका लिखा हुआ समाज को बचायेगा,

No comments:

Post a Comment