Monday, March 20, 2017

जयपुर की निशात बहन

साइकिल यात्रा करते हुए जयपुर पहुंच गया ၊
आज ईदगाह के पास एक बस्ती में गया ၊
मुस्लिम महिलाओं के साथ चर्चा हुई ၊
मुझे निशात बहन ने वहाँ बुलाया था ၊
निशात बहन महिला आंदोलन का एक जाना माना नाम है ၊
निशात हंसते हुए बताती हैं मेरे गांव का नाम सीताबाड़ी हैं और मैं शादी होकर रामगंज में आयी ၊
सीता और राम की बात बताते हुए निशात के चेहरे पर खुशी की चमक कौंघ जाती है,
सन 1989 में रामगंज में सांम्प्रदायिक दंगा फूटा,
भाजपा सत्ता के लिये राम के नाम पर देश भर में नफरत फैला रही थी,
दंगों में 92 कत्ल एक ही दिन में हुए ,
पुलिस ने सभी लाशों के कपड़े उतार कर अस्पताल में ढेर लगा दिया और लाशों को ठिकाने लगा दिया ၊
निशात के दो भतीजे भी गायब हो गये थे,
दोनों के कपड़े उसी ढेर में मिल गये थे,
निशात बताती हैं कि मैं तब एक स्कूल चलाती थी,
उसमें 2 प्रतिशत बच्चे ही मुस्लिम थे, बाकी ज़्यादातर रैगर यानी दलित परिवारों के थे,
एक दिन दंगाइयों ने निशात का घर घेर लिया,
निशात ने छ्त पर चढ़ कर सबको मदद के लिये पुकारा,
पर उस मुहल्ले से कोई नहीं आया,
लेकिन निशात की आवाज़ कुछ दूर बसे दलित परिवारों ने सुन ली,
पूरा दलित मुहल्ला निशात के घर के चारों तरफ इकट्ठा हो गया,
दंगाइयों ने दलितों को हिन्दू होकर मुसलमान को बचाने का उलाहना दिया,
दलितों ने जवाब दिया तुम लोगों ने हमे कभी इंसान भी नहीं माना,
ये निशात बहनजी ने हमें गले लगाया है और हमारे बच्चों को शिक्षित किया है,
जब तक हम जिंदा हैं निशात बहनजी को कुछ नहीं होने देंगे,
यह बताते हुए निशात की आवाज़ भर्रा जाती है,
इसके बाद निशात ने दंगों में जाकर शान्ति स्थापित करना,
हिन्दू और मुसलमान औरतों का पुनर्वास करना अपने जीवन का मिशन बना लिया,
लेकिन इस सब से संघी और बजरंगी निशात से खार खाने लगे थे,
1992 में निशात के मुहल्ले के लड़कों ने दंगों में निशात के पति और दो बेटों पर जानलेवा हमला किया,
निशात ने कोई रिपोर्ट नहीं लिखवाई,
कुछ वर्षों बाद वो हमलावर लड़के निशात के घर आकर पैरों में गिर कर माफी मांगने लगे और कहा कि आप थाने में लिख कर दे दीजिये कि हम हमले में शामिल नहीं थे,
निशात बताती हैं वे लड़के मेरे बेटों के दोस्त ही थे लेकिन संघ ने उनके दिमागों में ज़हर भर दिया था,
निशात ने उन लड़कों के निर्दोष होने का कागज़ लिख दिया,
निशात ने 'नेशनल मुस्लिम वीमेन वेलफेयर सोसाइटी' का गठन किया,
आज इस संगठन से हज़ारों महिलायें जुड़ी हुई हैं,
निशात बहन को नेशनल यूनिटी एवार्ड, शान्ति दूत एवार्ड और बाद में अनेकों पुरस्कार मिले ၊
आज निशात बहन हज़ारों औरतों की मज़बूती का संबल हैं ၊
निशात बहन की हिम्मत और जज़्बे को सलाम ၊

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