Saturday, September 3, 2011

"सुप्रीम कोर्ट की ऐसी की तैसी"- हिमांशु कुमार


अगर किसी को कोई मारे तो वो पुलिस के पास जाएगा ! लेकिन अगर पुलिस किसी लुटेरे से पैसा खाकर उसकी बेटी से बलात्कार करे और उसकी बेटी को मार भी दे तब उसे कहाँ जाना चाहिए ? हम कहेंगे कोर्ट में ! वो पीड़ित सुप्रीम कोर्ट में गया और मुकदमा जीत भी गया ! अब अपराधी को कौन पकड़ेगा ? वही पुलिस जिसने बलात्कार किया है ? अब अगर सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर अमल नहीं होता और वही पुलिस अपने खिलाफ कोर्ट में जाने वालों को मारना शुरू कर दे तो उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए ? मैं ये प्रश्न अपने दोस्तों से नहीं पूछ रहा हूँ! मैं अपने आलोचकों और मुझे नक्सलियों का समर्थक कहने वालों से पूछ रहा हूँ ! अब वो पीड़ित क्या करें ? अब वो कहाँ जाय ?    

बस्तर में सरकार (दिल्ली और रायपुर दोनों ने मिलकर)  सैंकड़ों आदिवासियों के घर जला दिए ! सैंकड़ों आदिवासी लड़कियों की इज्ज़त लूटी ! बच्चों और बूढों को काट डाला ! हजारों बेगुनाहों को जेलों में सड़ने के लिए डाल दिया है ! जेलों में आदिवासियों को रखने की जगह नहीं बची है !  आदिवासियों की मदद की कोशिश करने वाले लोगों पर हमला किया गया !  ये सब अभी भी चालू है !
अभी कुछ हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस सब को रोकने का सरकार को आदेश दिया ! सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश की एक भी बात नहीं मानी ! इस देश में अगर सरकार कानून को  नहीं मानेगी  ! तो क्या होगा ? 
 सुप्रीम कोर्ट ने कहा सारे एस पी ओ से हथियार ले लो ! सरकार ने नहीं माना ! एस पी ओ का नाम बदल कर 'छत्तीसगढ़ ओग्जिलिअरी फ़ोर्स' रख दिया ! और इस तरह एक भी एस पी ओ से हथियार नहीं लिया !और ये एस पी ओ उन्ही गुंडे लोगों की सेना है जिनके खिलाफ छत्तीसगढ़ के ही कोर्ट के वारंट हैं! सरकार कोर्ट में बोल देती है की ये लोग हमें मिल नहीं रहे हैं ! सरकार इन्हें लगातार वेतन दे रही है ! और ये लोग लगातार नए नए गाँव जला रहे हैं और हत्याए कर रहे हैं ! नए बलात्कार कर रहे हैं ! और सरकार बिना डरे कोर्ट में कह देती है की ये लोग हमें मिल नहीं रहे हैं ! इन फरार एस पी ओ में से एक जिसका नाम किच्चे नंदा है वो तो हाल में दंतेवाडा से बाहर भेजे गए डी.आई.जी कल्लूरी का बाडी गार्ड है ! और सरकार बेशर्मी से बिना क़ानून से डरे हुए कोर्ट में कहती है वो मिल नहीं रहा है! करतम सूर्या पुलिस कांस्टेबल है जिसकी लीडरशिप में अभी इसी मार्च में दंतेवाडा में पुलिस द्वारा  तीन नये गाँव जलाये गए वो भी सरकार के द्वारा कोर्ट में फरार बताया गया है! हांलाकी वो थाने के भीतर ही रहता है , सरकार से लगातार वेतन लेता है ! इन सब के ऊपर बलात्कार के केस में वारंट है !   
 फाईलें पलटते हुए आज  मुझे एक आदिवासी का पत्र मिला ! उसमे वो आदिवासी एस पी को लिखता है कि मुझे और दुसरे तेईस गाँव वालों को फलां फलां नाम के एसपीओ घर से निकाल कर जंगल में ले गए और लाइन में खड़ा कर के गोली मार दी! उन्नीस लोग वही मर गए ! हम पांच लोग भाग गए और बच गए ! 
 अब इस घटना में वो चश्मदीद गवाह है ! वो लाशें भी दिखा रहा है ! आरोपियों के नाम भी बता रहा है ! पर उसकी रिपोर्ट आज तक नहीं लिखी गयी ! हमारी संस्था इस घटना की सिर्फ एक ऍफ़ आई आर लिखने की  मांग को लेकर 16 जनवरी 2008 से आज 32 महीने तक अदालत का दरवाज़ा खडखड़ा रही है! पर नहीं लिखवा पाए ! आप ऍफ़ आई आर ही नहीं लिखेंगे ? जांच ही नहीं होने देंगे? अगर मारे गए लोग नक्सली थे तो जाँच होने दो ! होने दो दूध का दूध और पानी का पानी ! जाँच की मांग करने वालों का आश्रम क्यों तोड़ते हो ?   
 सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बस्तर में इन एस पी ओ को दिल्ली की केंदीय सरकार द्वारा तनख्वाह देने पर रोक लगाई है ! पर चिदंबरम साहब के नेतृत्व वाली होम मिनिस्ट्री सुप्रीम कोर्ट में कहती है कि " सुप्रीम कोर्ट कानून व्यवस्था " के मामले में दखल ना दे ! तुम कानून व्यवस्था के नाम पर लड़कियों से बलात्कार करते हुए पकडे गए हो ! इसलिए सुप्रीम कोर्ट तुम्हे रोक रहा है पर तुम उसकी बात मानोगे ही नहीं?  फिर क्या होगा? लोग अब क्या करें ? कहाँ जाएँ !
 अभी बस्तर में सेना भेज दी गयी है ! यानी जो काम अंग्रेजों की सेना ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए करती थी अब वो काम भारत की सेना अनेको ईस्ट इंडिया कंपनियों के लिए करेगी ! और याद रखिये सेना भेजने का फैसला करने वाले चिदंबरम वही सज्जन हैं जिन्होंने लन्दन में भाषण दिया था कि पहले आप एक कंपनी के रूप में आये लेकिन आपको दो सौ साल में भारत छोड़ कर जाना पड़ा ! इस बार आप हजारों कंपनियों के रूप में आइये और हमेश भारत में रहिये !
  मीडिया को इस सब नंगे भूखे लोगो की स्टोरी में इंटरेस्ट नहीं है ! शहरी लोगों को विकास चाहिए इस लिए वो जान बूझ कर इस तरफ से आँख कान बन्द कर लेते  है !  पर ये तो सोचो ये अस्सी परसेंट गरीब इस हालत को कितने दिन चुपचाप सहन करेंगे ? इन हालात में अशांति नहीं होगी तो क्या शांति होगी ?


  

5 comments:

  1. Esteemed Himanshuji,
    Kicchhe Nanda is not an S.P.O. Heis a constable who leads commandos.There is no question of his running away.D.I.G.Kalluri is in Hyderabad now a days.Anyone can go & confirm it.

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  2. इन लोगों को जिंदा जमीन में गाड़ दिया जाय। शब्द पुष्टिकरण हटा दीजिए। आसानी होगी।

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  3. हिमांशु जी,बस ये सब देख कर और सरकारी तंत्र की मनमानी से frustration होने लगा है......और राजेश जी,नंदा एक spo ही था,और जिस commondo दस्ते की बात आप कर रहे है 'कोया कमांडो'.ये फुल टाइम पुलिस नहीं है.और ऐसे दस्तो के नेता spo ही है और थे.कच्चे नंदा भी ऐसा ही था.उस ग्रुप को नंदा ग्रुप कहा जाता था.

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  4. Dear Ankitji,
    Nanda was not an S.P.O. Kindly go & confirm this with Dantewada Police.

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