Monday, September 2, 2013

खैरुन्निसा



वो चल नहीं पा रही थी। उसके शरीर पर पिटाई के नीले और लाल निशान थे। उसे पुलिस वालों ने थाने के भीतर चार दिन तक पीटा था।  थाने  में पुलिस वालों ने उसके साथ लगातार चार दिनों तक बलात्कार किया था । 

ये पिछले दिसम्बर की बात है।  सारी दिल्ली दामिनी काण्ड से उबल रही थी।  उन्ही दिनों में सताईस दिसम्बर को खैरुन्निसा को पुलिस वालों ने निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन से उठाया था । दिल्ली में बच्चे गायब होने की घटनाओं में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।  पुलिस किसी कमज़ोर शिकार की तलाश में थी।जिसके सर पर सारा इलज़ाम डाल कर पुलिस अपनी जान छुड़ा सके।   

खैरुन्निसा मध्य प्रदेश में रहती थी।  दिल्ली में एक दुर्घटना में उसके दामाद का पैर कट गया था। खैरुन्निसा सात साल की अपनी छोटी नातिन को साथ लेकर अपने छोटे दामाद को देखने मध्य प्रदेश से दिल्ली आई थी। पुलिस ने एक अकेली महिला को एक बच्ची के साथ देखा और उठा कर थाने में ले गए। खैरुन्निसा के साथ चार दिन तक पुलिस वालों ने बलात्कार किया।  एक जनवरी को खैरुन्निसा को उसी की नातिन के अपहरण का  फर्जी मामला बना कर साकेत कोर्ट के मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर दिया गया।    

मजिस्ट्रेट ने खैरुन्निसा को तिहाड़ जेल भेज दिया। मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली एक महिला वकील ने पता लगाया की खैरुन्निसा की नातिन कहाँ है।  बच्ची लाजपत नगर के रिमांड होम में मिल गयी।  उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।  बच्ची ने जज के सामने चिल्ला कर खैरुन्निसा को देख कर चिल्ला कर बुलाया 'नानी '

कोर्ट ने खैरुन्निसा को जमानत पर रिहा करने का हुक्म दे दिया।  लेकिन दस हज़ार की ज़मानत कौन देता? खैरुन्निसा जेल में ही पडी रही।  दुबारा फिर अदालत में ज़मानत के लिए अर्जी लगाईं गयी फिर पन्द्रह हज़ार के मुचलके पर उसे रिहा करने का हुक्म हुआ।  पर रूपये कहाँ से आते।  खैरुन्निसा जेल में ही पडी रही।  तीसरी बार अदालत ने खिरुन्निसा को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा करने का हुक्म दिया। खैरुन्निसा ज़मानत पर रिहा हो गयी। 
 
लेकिन इस बीच इस सदमे से खैरुन्निसा के पति की मौत हो गयी। 
दिल्ली की एक मानवाधिकार संस्था ने इस मामले को हाई कोर्ट में उठाया।  कोर्ट ने इस मामले की जांच का आदेश दिया।  लेकिन इस लो प्रोफाइल मामले की जांच आज तक दबी ही हुई है। 
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इस बाबत लिखा गया था। 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हमेशा की तरह आरोपी को ही जांच का ज़िम्मा दे दिया।    
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ले के पुलिस कमिश्नर को मामले की जांच करने का पत्र भेज दिया।  
पुलिस विभाग ने अभी तक कोई जांच नहीं की। 

खैरुन्निसा वापिस मध्य प्रदेश चली गयी। 
खैरुन्निसा अब बस मेरी मेज़ पर पडी हुई अनेकों कहानियों में से एक कहानी बन कर रह गयी है।  
इसी शहर में संसद है , बहुत बड़ी अदालत है , अखबार हैं , सबसे महान संस्कृति के लोग यहीं पर हैं। 
इसी शहर में बहुत सारी खैरुन्निसायें भी है।  


2 comments:

  1. yar rongate khade ho jate hai aisi ghatnane sunkar

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  2. Oh!
    Stunning and a commom epidemic of Police Culture.
    -Kumar Ambuj

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