Sunday, December 23, 2012

हमारे विकास के लिये दो ही चीज़ें ज़रूरी हैं विदेशी कंपनियां और हमारे ज्यादा सैनिक


आइये हम सब मिलकर सरकार से कहें कि हुज़ूर मुल्क में सब ओर खुशहाली फ़ैली हुई है . आपकी भेजी हुई फौजें बस्तर में आदिवासी लड़कियों की बहुत अच्छे से सेवा कर रही है . जंगल में आदिवासी खुशी के मारी नाच नाच कर मरे जा रहे हैं .उधर कश्मीरी औरतें भी सेना के सिपाहियों के कारण खुशी के गाने गा रही  हैं . उधर  मणिपुर वगैरह की तरफ अपनी ज़मीने हज़ारों बाँध बनाने के लिये ले लिये जाने पर वहाँ की जनता आपको दिल से दुआएं दे रही है. हुज़ूर मुल्क में चैन बस आपकी बंदूकों की वजह से ही कायम है 

 हम आपसे पूरी तरह सहमत हैं हुजूर कि हमारी सारी खदानों में दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियों की मशीने सारा खनिज खोद लेंगी . सोचिये उस से हमारा कितना सारा विकास एक साथ ही हो जायेगा . बस सोने का अंडा देने वाली मुर्गी का पेट काटो और सारे अंडे निकाल लो  . हुजूर आप इन पढ़े लिखे लोगों की बात मत सुनिये जो ये कह्ते रहते हैं कि खनिज सम्पदा पर हमारे बच्चों का भी अधिकार है . हम तो हुज़ूर बस विकास दर को बढते हुए देखने के लिये मरे जा रहे हैं .

 हम चिदम्बरम साहब के सपने के सच होने का इंतज़ार कर रहे हैं जिसमे उन्होंने कहा था कि मैं ऐसे भारत का सपना देखता हूं जिसमे पिच्चासी प्रतिशत भारतीय शहरों में रहेंगे .बस हुजूर हम उस दिन के इन्तेज़ार में हैं जब भारत के ये पिच्चासी प्रतिशत गंवार लोग अपना गाँव छोड़ कर शहरों में बसने आ जायेंगे . इनकी ज़मीनों पर अम्बानी साहब और वालमार्ट के बड़े बड़े ट्रैक्टर चलेंगे .   और ये पिच्चासी प्रतिशत लोग बस घर से निकलेंगे शापिंग माल में जायेंगे और दाल चावल ले आयेंगे . ना किसी को खेत में काम करने की ज़रूरत है ना काम पर , बस मजे में घर में पड़े पड़े टीवी देखो 

हुजूर हम आपसे पूरी तरह सहमत हैं कि हमारे विकास के लिये दो ही चीज़ें ज़रूरी हैं विदेशी कंपनियां और हमारे ज्यादा सैनिक . सारे मुल्क में विदेशी कंपनियां फैला दीजिए और जो भी हमारे इस विकास पर सवाल उठाये उसे खत्म कर दीजिए हुज़ूर . इन गरीब गुरबों को विदेशी कंपनियों के खिलाफ भडकाने और लोगों को इकट्ठा करने वालों को आप नक्सली और देश द्रोही कह कर मार दीजिए . और इन कंपनियों के खिलाफ बोलने वाले और कवितायेँ लिखने वालों को जेलों में सड़ा दीजिए हुज़ूर .. 


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